नमस्ते भाइयों और बहनों!
क्या आपने कभी सोचा है कि मार्केट में जो भारी हलचल होती है, उसके पीछे असली बाजीगर कौन हैं? बहुत से लोग सिर्फ चार्ट्स और कैंडलस्टिक्स को देखते हैं, लेकिन अगर आपको स्मार्ट पैसा (Smart Money) फॉलो करना है, तो आपको 'डिलीवरी डेटा' को समझना पड़ेगा। आज के इस ब्लॉग में हम इसी का पूरा पोस्टमार्टम करेंगे और जानेंगे कि कैसे छोटे ट्रेडर्स इसका फायदा उठा सकते हैं।
डिलीवरी डेटा असल में है क्या?
जब भी हम स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदते हैं, तो हमारे पास दो विकल्प होते हैं: या तो हम उसे उसी दिन बेच दें (Intraday) या फिर उसे खरीदकर अपने डीमैट अकाउंट में रख लें (Delivery)। 'डिलीवरी डेटा' हमें बस यही बताता है कि उस दिन कुल कितने शेयर खरीदे गए और उनमें से कितने लोग सच में घर लेकर गए (मतलब होल्ड किया)।
इसे एनालिसिस करने का 'प्रो' तरीका:
• डिलीवरी परसेंटेज (Delivery Percentage) का जादू: अगर किसी स्टॉक की कुल ट्रेडिंग का 50% या उससे ज्यादा हिस्सा 'डिलीवरी' में जा रहा है, तो समझ लो कि उस शेयर में कोई बड़ा invest हो रहा है। बड़े investor या ऑपरेटर छोटे-मोटे इंट्राडे ट्रेड नहीं करते, वे पैसा फंसाकर लंबे समय के लिए बैठते हैं।
• प्राइस और डिलीवरी का खेल: मान लो मार्केट गिर रहा है, लेकिन डिलीवरी परसेंटेज बढ़ रहा है—तो भाई, ये एक बहुत बड़ा इशारा है। इसका मतलब है कि बड़े लोग गिरते हुए मार्केट में भी इस स्टॉक को सस्ते दाम पर धीरे-धीरे अपनी झोली में भर रहे हैं। इसे ही टेक्निकल भाषा में 'एक्यूमुलेशन' (Accumulation) कहते हैं।
• वॉल्यूम के साथ कन्फर्मेशन: अगर वॉल्यूम (ट्रेडिंग की कुल संख्या) बढ़ रही है और साथ ही डिलीवरी भी बढ़ रही है, तो समझ लो कि शेयर अब तैयार है एक बड़ी मूवमेंट के लिए।
इसे चेक कैसे करें?
भाइयों, ये डेटा हमें NSE की वेबसाइट या किसी भी भरोसेमंद ट्रेडिंग ऐप (जैसे Zerodha, Angel One) पर 'Market Watch' या 'Stock Details' में आसानी से मिल जाता है। बस 'Delivery Position' या 'Delivery %' वाला कॉलम ध्यान से देखो।
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ये भी ध्यान में रखें:
• हमेशा याद रख कि सिर्फ एक दिन का डेटा देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए, कम से कम 3-5 दिनों का ट्रेंड देख।
• अगर वॉल्यूम के साथ प्राइस ऊपर जा रहा है, तो ये 'बुल्स' (Bulls) की मजबूती दिखाता है।
• अगर डिलीवरी % अचानक से 70-80% के ऊपर चला जाए, तो समझो वहां कोई बड़ी खबर या बड़े ऑपरेटर की एंट्री हुई है।
• अपनी ट्रेड को हमेशा स्टॉप लॉस (Stop Loss) के साथ ही प्लान करे, क्योंकि डेटा सिर्फ एक संकेत है, गारंटी नहीं।
मैंने ऊपर जो इमेज दी है उसे देखो। इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे हाई वॉल्यूम के साथ जब डिलीवरी बढ़ती है, तो मार्केट में एक बड़ा मूव आने की तैयारी होती है।
जरूरी बात : तो अगली बार जब आप ट्रेड करो, तो सिर्फ कैंडल को मत देखो, डिलीवरी डेटा को भी देखो। यह आपको इंट्राडे के शोर से दूर, असल में मार्केट की दिशा बताएगा। ट्रेडिंग में 'पेशेंस' (Patience) और 'डेटा' ही असली हथियार है!
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Dicilamer:इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों (educational purposes) के लिए है और यह मेरी व्यक्तिगत ट्रेडिंग डायरी और अनुभव पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग में वित्तीय जोखिम होता है। किसी भी ट्रेड को लेने से पहले कृपया अपनी खुद की रिसर्च करें या अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। मेरे द्वारा साझा किए गए किसी भी लेवल या तरीके से होने वाले किसी भी नफे या नुकसान के लिए 'shyam trader' जिम्मेदार नहीं होगा।


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