Algo Trading क्या है और कैसे करें? बिना कोडिंग के ऑटोमैटिक ट्रेडिंग करने का आसान तरीका


क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप सो रहे हों या अपने दूसरे काम कर रहे हों, तब भी आपका कंप्यूटर आपके लिए अपने आप सही समय पर ट्रेड ले रहा हो और प्रॉफिट बना रहा हो? सुनने में यह किसी जादू जैसा लगता है, लेकिन आज की टेक्नोलॉजी ने इसे सच कर दिखाया है। इसे ही 'एल्गो ट्रेडिंग' (Algo Trading) या ऑटोमेटेड ट्रेडिंग कहते हैं। आजकल के दौर में यह तकनीक बहुत तेज़ी से पॉपुलर हो रही है। आइए जानते हैं कि यह क्या है और कैसे काम करती है।

• एल्गो ट्रेडिंग क्या होती है? (What is Algo Trading in Hindi)

 एल्गो ट्रेडिंग का पूरा नाम 'अल्गोरिदम ट्रेडिंग' है। आसान शब्दों में कहें तो इसमें हम कंप्यूटर को एक खास नियमों (Rules) का सेट दे देते हैं। उदाहरण के लिए, हम कंप्यूटर में प्रोग्राम सेट कर सकते हैं कि "जब भी मार्केट में यह खास इंडिकेटर सिग्नल दे, तो तुरंत शेयर खरीद लो और इतने पॉइंट का प्रॉफिट होते ही बेच दो।" इसके बाद कंप्यूटर खुद ही, बिना किसी इंसानी मदद के, पलक झपकते ही ऑर्डर प्लेस कर देता है। इसमें आपको खुद स्क्रीन के सामने दिनभर बैठने की ज़रूरत नहीं होती। 

एल्गो ट्रेडिंग के सबसे बड़े फायदे (Pros of Algo Trading)

• भावनाओं से मुक्ति (No Emotions): इंसानी ट्रेडिंग में डर और लालच सबसे बड़े दुश्मन होते हैं, जिनकी वजह से लोग ओवर-ट्रेडिंग कर बैठते हैं। कंप्यूटर के पास कोई भावना नहीं होती, इसलिए वह केवल आपके बनाए नियमों पर ही काम करता है। 

• सुपर फ़ास्ट स्पीड (Super Speed): एक इंसान को चार्ट देखकर बटन दबाने में 2 से 5 सेकंड का समय लग सकता है, लेकिन कंप्यूटर इस काम को एक सेकंड के सौवें हिस्से (मिलीसेकंड्स) में कर देता है। 

• बैकटेस्टिंग की सुविधा (Backtesting): आप अपनी किसी भी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी को कंप्यूटर के जरिए पिछले 5 या 10 साल के मार्केट डेटा पर टेस्ट करके देख सकते हैं कि उसने अतीत में कैसा परफॉर्म किया था। इससे आपको उसकी सटीकता का पता चल जाता है।

एल्गो ट्रेडिंग की कमियाँ और रिस्क (Cons of Algo Trading)

• तकनीकी खराबी का डर (Technical Issues): यह पूरी तरह इंटरनेट, बिजली और सर्वर पर निर्भर है। अगर ट्रेड के समय इंटरनेट चला जाए या कोई बग (Bug) आ जाए, तो बड़ा नुकसान हो सकता है। 

• बड़ी खबरों को न समझ पाना: मार्केट कई बार न्यूज़ और ग्लोबल इवेंट्स के हिसाब से चलता है। रोबोट अचानक आई किसी बड़ी खबर या देश के हालातों को इंसानों की तरह समझ नहीं पाते, जिससे वो गलत ट्रेड ले सकते हैं। 

• महँगा सेटअप और कोडिंग: एक अच्छा और सटीक एल्गो सेटअप तैयार करने के लिए कोडिंग की जानकारी होनी चाहिए या फिर महंगे सॉफ्टवेयर और टूल्स खरीदने पड़ते हैं।

 जरूरी बात:  एल्गो ट्रेडिंग उन ट्रेडर्स के लिए एक बेहतरीन टूल है जो अपनी स्ट्रेटजी को बिना किसी भावना (Emotions) के पूरी डिसिप्लिन के साथ चलाना चाहते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह कोई अलादीन का चिराग है जो बिना सोचे-समझे रोज़ पैसा छाप कर देगा। अगर आपकी स्ट्रेटजी मजबूत है, तभी एल्गो काम करेगा। एक नए ट्रेडर को हमेशा पहले खुद मैन्युअल ट्रेडिंग सीखनी चाहिए, उसके बाद ही एल्गो की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए।

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