(राम राम भाइयों और बहनों स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग पर)
दोस्तों, आज हम बात करेंगे 'शॉर्ट कवरिंग' के बारे में। जब मैंने ट्रेडिंग शुरू की थी, तो मुझे लगता था कि गिरता हुआ मार्केट हमेशा गिरता ही रहेगा, लेकिन वहीं मुझसे बड़ी गलती हुई।
शॉर्ट कवरिंग क्या है? (सरल शब्दों में)
जब मार्केट गिर रहा होता है, तो बहुत से लोग (शॉर्ट सेलर्स) पैसा बनाने के लिए शेयर बेचते हैं। लेकिन जब उन्हें डर लगता है कि मार्केट और नीचे नहीं जाएगा, तो वे अपने बेचे हुए शेयर वापस खरीद लेते हैं। इसी को 'शॉर्ट कवरिंग' कहते हैं। इसकी वजह से मार्केट में अचानक एक तेज उछाल आता है।
मेरी वो गलती, जो आप न दोहराएं🙏👇
शुरुआत में, जब मार्केट गिरते-गिरते अचानक ऊपर भागता था, तो मैं उसे 'बुल मार्केट' समझकर लालच में फंस जाता था।
गलती 1: मैं सिर्फ प्राइस देखकर कूद पड़ता था, ये नहीं देखता था कि ये सिर्फ शॉर्ट कवरिंग है या असली बाइंग।
गलती 2: मैं वॉल्यूम नहीं देखता था। जबकि शॉर्ट कवरिंग में वॉल्यूम का बढ़ना सबसे बड़ा सबूत होता है।
नतीजा: जैसे ही शॉर्ट कवरिंग खत्म होती थी, मार्केट फिर से गिर जाता था और मेरा स्टॉप-लॉस हिट हो जाता था।
इसे कैसे पहचानें?
अब मैं समझ गया हूँ कि बिना तैयारी के ट्रेड नहीं करना है। आप ये 3 बातें याद रखें:
1. वॉल्यूम चेक करें: अगर प्राइस ऊपर जा रहा है और वॉल्यूम बढ़ रहा है, तो चांस है कि शॉर्ट कवरिंग हो रही है।
2. सपोर्ट लेवल: अगर गिरते हुए मार्केट में कोई मजबूत सपोर्ट के पास बड़ी ग्रीन कैंडल बने, तो अलर्ट हो जाएं।
3. लालच न करें: ये मूव बहुत तेज होते हैं। अपनी पोजीशन जल्दी एग्जिट करना सीखें।
जरूरी बात: ट्रेडिंग सिर्फ पैसा कमाने का खेल नहीं है, ये अपनी गलतियों को सुधारने का खेल है। मैंने जो गलती की, आप वो न करें।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस पोस्ट में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक (Educational) उद्देश्यों के लिए है। मैं कोई सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड एडवाइजर नहीं हूँ। शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग जोखिम के अधीन है। कोई भी ट्रेड लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें या अपनी खुद की रिसर्च जरूर करें। मेरी किसी भी ट्रेड या नुकसान के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। क्या आप भी ऐसी गलती करते हैं? क्या आपने कभी शॉर्ट कवरिंग के चक्कर में मार्केट में अपनी पोजीशन फंसाई है? नीचे कमेंट में अपनी कहानी जरूर बताएं!

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