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क्या ब्रेकआउट असली है? कन्फर्मेशन का सच समझो
अक्सर हम मार्केट के ट्रेंड को देख लेते हैं, लेकिन असली दुविधा तब होती है जब कोई लेवल टूटता है। क्या वह ब्रेकआउट सच में ट्रेंड को जारी रखेगा, या हमें फंसाकर वापस घूम जाएगा? आज हम 'Trend Confirmation' का वह तरीका सीखेंगे जो प्रो ट्रेडर्स इस्तेमाल करते हैं।
ट्रेंड कन्फर्म करने के 3 पक्के नियम (rule)
1. हायर हाई और हायर लो (Higher High & Higher Low): अगर मार्केट ऊपर जा रहा है, तो हर नया 'हाई' पिछले 'हाई' से ऊपर होना चाहिए। अगर प्राइस इस स्ट्रक्चर को तोड़ दे, तो समझो ट्रेंड कमजोर हो रहा है।
2. सपोर्ट और रेजिस्टेंस फ्लिप: जब कोई पुराना रेजिस्टेंस टूटता है, तो वही अब सपोर्ट की तरह काम करना चाहिए। अगर प्राइस उसे होल्ड नहीं कर पाता, तो वह फेक ब्रेकआउट है।
3. कैंडलस्टिक की क्लोजिंग: हमेशा याद रखो, सिर्फ लेवल को छूना ब्रेकआउट नहीं है। कैंडल की क्लोजिंग लेवल के बाहर मजबूती से होनी चाहिए।
प्रो टिप: जल्दबाजी न करें
ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स ब्रेकआउट होते ही एंट्री ले लेते हैं। प्रो ट्रेडर हमेशा 'रिटेस्ट' (Retest) का इंतजार करते हैं। अगर प्राइस लेवल को तोड़ने के बाद वापस आकर उसी लेवल से सपोर्ट ले और फिर ऊपर जाए, तब कन्फर्म होता है कि ट्रेंड वाकई मजबूत है।
जरूरी बात 👉 ट्रेंड कन्फर्म करना कोई जादू नहीं, बल्कि धैर्य का खेल है। अगर डेटा और प्राइस एक्शन दोनों एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं, तभी अपना ट्रेड प्लान करें।
🤔क्या आपने हाल ही में किसी ऐसे ब्रेकआउट को देखा है जो कन्फर्मेशन के बाद सच साबित हुआ? हमें कमेंट्स में अपना अनुभव बताएं!
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Disclaimer:इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों (educational purposes) के लिए है और यह मेरी व्यक्तिगत ट्रेडिंग डायरी और अनुभव पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग में वित्तीय जोखिम होता है। किसी भी ट्रेड को लेने से पहले कृपया अपनी खुद की रिसर्च करें या अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। मेरे द्वारा साझा किए गए किसी भी लेवल या तरीके से होने वाले किसी भी नफे या नुकसान के लिए 'shyam trader' जिम्मेदार नहीं होगा।

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